24 Aug 2010
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
ना जाने क्यूँ उलझी हैं कुछ बातें जहन में मेरे
ना जाने क्यूँ अटकी हैं कुछ साँसे सीने में मेरे
रह-रह कर चुभती हैं वो बातें जहन मेरे
कुछ तो अब भी बाकी है इसीलिए शायद
अब भी अटकी हैं कुछ साँसे सीने में मेरे
पल-पल हर पल ये सोचा करता हूँ
क्यूँ ये बातें उलझी हैं जहन में मेरे
क्यूँ ये अटकी है साँसे सीने में मेरे
19 Aug 2010
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
उलझने उलझी हैं जहन मे मेरे… साँसे अटकी है सीने मे मेरे…
ना तो उलझने सुलझती हैं… ना ही साँसे निकलती हैं…
01 Feb 2010
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
जब -जब चाहा
तब-तब पाया,
तू तो मेरे साथ ही था…
नाहक ही मैं भटका,
जब तू मेरे साथ ही था…
जब -जब चाहा
तब-तब पाया….
31 Jan 2010
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
सारी-सारी रात जगाती हैं तनहाइयाँ मुझे|
अक्सर कुछ इस तरह से तड्पाती हैं मुझे|
ना कुछ करने देती हैं अब तनहाइयाँ मुझे|
हक़ समझ अपना हर-बार तड्पाती हैं मुझे|
चाहता हूँ सोना मैं उम्र भर के लिए मगर|
नींद में भी आकर जगाती हैं तनहाइयाँ मुझे|
अक्सर कुछ इस तरह से तड्पाती हैं मुझे|
31 Jan 2010
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
झिझक अब अपनी मिटाने की कसम खाता हूँ|
कैसे भी कर के ये उनको बताने की कसम खाता हूँ|
रह जाता हूँ हर-बार उलझ कर उलझनों में जिनकी|
ना जाने कैसी ये उनको बताने कसम खाता हूँ|
झिझक अब अपनी मिटाने की कसम खाता हूँ|
30 Dec 2009
SUNIL SHIVHAREPosted under 1
आज फ़िर तेरी याद आयी
कुछ आँसू कुछ यादें साथ लायी
नहीं चाहता था मैं याद करना तुझे
मगर फ़िर भी तेरी याद आयी
कुछ आँसू कुछ यादें साथ लाई
सालों का क्या है ये तो आते-जाते रहते हैं
एक जाता है तो दूसरा आता है
बस इसी तरह से यादें हैं
एक जाती है तो दूसरी आती है
कुछ ख़्वाब थे आँखो मैं मेरे
कुछ ख़्वाब होंगे तुम्हारी भी आँखो मैं शायद
क्यूंकी रिश्ता ही ख्वाबों का कुछ ऐसा ही आँखो से है
जैसे खुशबू का फूल से पानी का प्यास से
प्यास तो बुझ जाती है पानी से मगर
तेरी याद बुझती है तेरे आने से
बस इसीलिए आज फिर तेरी याद आयी
कुछ आँसू कुछ यादें साथ लायी
आज फिर तेरी याद आयी….
16 Apr 2009
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मेरा रिश्ता है उनसे कुछ ऐसा
फूलों का खूशबू से जैसा
आँखो का आसुओं से जैसा
प्यास का पानी से जैसा
बस मेरा रिश्ता है उनसे कुछ ऐसा
कई बार कोशिश की थी
भुलाने की उनको
मगर ये मुमकिन ना हुआ
हर बार कि तरह इस बार भी
नाकामयाब भी हुआ
फिर भी करता हूँ कोशिश
हर बार भुलाने की उनको
जानकर भी कि ना जाने क्यूँ
मेरा रिश्ता है उनसे कुछ ऐसा
फूलों का खूशबू से जैसा
आँखो का आसुओं से जैसा
प्यास का पानी से जैसा
बस मेरा रिश्ता है उनसे कुछ ऐसा
09 Apr 2009
SUNIL SHIVHAREPosted under Uncategorized
उलझने दो मुझे उलझनों मे
अनचाही परेशानियों मे
उन गेशुओं के घने अंधेरो मे
इन दिन के सुर्ख उजालों मे
अब ये सब बड़े ही अच्छे लगते हैं
ना जाने क्यूँ उजाले चुभते हैं
एक अज़ीब सा कड़वा ही सही
कुछ-कुछ मीठा सा लगता है
अब तो आदत सी हो गयी है
जब-जब ये कड़वा सा लगता है
उलझने दो मुझे उलझनों मे
अनचाही परेशानियों मे
उन गेशुओं के घने अंधेरो मे
इन दिन के सुर्ख उजालों मे…
25 Mar 2009
SUNIL SHIVHAREPosted under Uncategorized
सुलगने लगा है
सीने मे कुछ तो मेरे
क्या करूँ किससे कहूँ
कब से सुलग रहा है
वो सवाल सीने मे मेरे
कुछ तो करूँ
किसी से तो कहूँ
अब ये बात तो मैं
होने लगी है
एक तक़लीफ़ सी
अब जीने मे मुझे
साँस लेने मे मुझे
आँच सी लगती है
सीने मे मुझे
क्या करूँ किससे कहूँ
अब ये बात मैं…
पिघलने लगा है
कुछ दिनो से
वो सवाल सीने मे मेरे
मज़ा सा आने लगा है
अब जीने मे मुझे
बुझने लगी है
सुलग रही आग
अब सीने मे मेरे
पिघलने लगा है
वो सवाल अब
सीने मे मेरे
मज़ा सा आने लगा है
अब जीने मे मुझे…
18 Mar 2009
SUNIL SHIVHAREPosted under Uncategorized
नादान था मैं नही जानता था ये क्या कर रहा था
उन हवाओं को पकड़ने की कोशिश कर रहा था
सोचता था शायद उन हवाओं मैं खुशबू हो तुम्हारी
बस यही सोचकर पकड़ने की कोशिश कर रहा था
नादान था मैं नही जानता था ये…….
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